चेन्नई: तमिलनाडु में गोहत्या पर मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए राज्य सरकार के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सरकार के इस फैसले को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। इस मुद्दे पर कांग्रेस और राहुल गांधी की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य में गाय और बछड़ों के वध पर सख्त रोक लगाने से जुड़ा आदेश दिया था। इसके खिलाफ तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार का कहना है कि हाई कोर्ट का आदेश राज्य के तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट, 1958 की मौजूदा कानूनी व्यवस्था से आगे बढ़कर है। इसलिए इस फैसले की न्यायिक समीक्षा जरूरी है।
विपक्ष ने बनाया राजनीतिक मुद्दा
सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले के बाद विपक्ष ने इसे राजनीतिक रंग देना शुरू कर दिया है। भाजपा और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता वाले मुद्दे पर गलत संदेश दे रही है। वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि मामला केवल कानून की व्याख्या और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है, न कि किसी धार्मिक भावना से।
राहुल गांधी और कांग्रेस क्यों चर्चा में?
तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस के समर्थन और विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों के कारण राहुल गांधी और कांग्रेस का नाम भी इस बहस में लिया जा रहा है। हालांकि इस कानूनी याचिका में कांग्रेस प्रत्यक्ष पक्षकार नहीं है, लेकिन विपक्ष इसे व्यापक राजनीतिक विमर्श से जोड़कर पेश कर रहा है।
क्या कहता है कानून?
तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट, 1958 के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद गोवंश के वध की अनुमति दी जा सकती है। राज्य सरकार का तर्क है कि हाई कोर्ट का आदेश इस कानूनी ढांचे से आगे जाकर पूर्ण प्रतिबंध लागू करता है। अब सुप्रीम कोर्ट में यह तय होगा कि हाई कोर्ट का आदेश कानून और संविधान के अनुरूप है या नहीं।
क्यों अहम है यह मामला?
गोहत्या का मुद्दा लंबे समय से देश की राजनीति और सामाजिक विमर्श का हिस्सा रहा है। ऐसे में तमिलनाडु सरकार की याचिका केवल एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गई है। सुप्रीम कोर्ट के आगामी फैसले पर सभी दलों और राज्यों की नजर रहेगी।